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टटका खबर

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Faith and belief have no locus standi in law


Muslim leaders are criticising Hasim Ansari who is talking to have some mutually acceptable agreement between Hindu and Muslims. But the fanatic leaders like Shahi Imam of Jama Masjid are against any move to get an out of court settlement on Ayodhya issue. They say that faith and belief should not have any place in a matter of law. But these very elements were against the Shahbano judgement because that was against Shariat.

अयोध्या विवाद के सर्वमान्य हल आ समझौता में लागल हासिम अंसारी के मुसलमान समुदाय के कट्टर तत्व विरोध कर रहल बाड़े. ओह लोग के कहना बा कि कानून में आस्था विश्वास के कवनो जगहा ना होखे के चाहीं. मुसलमानन के पूरा बाबरी मस्जिद चाहीं तिहाई जमीन से काम ना चली. इहाँ तक कि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्डो पर कांग्रेस के दलाली करे के आरोप लगावल जा रहल बा. जामा मस्जिद के शाही इमाम कहले बाड़न कि मुस्लिम कानून में समझौता के कवनो गुंजाइश नइखे.

शाहबानो मुकदमा में कोर्ट के फैसला के खिलाफ पूरा मुस्लिम सुमदाय कइले रहे कि शरीयत का मामिला में कोर्ट के दखलन्दाजी ना चली. मजबूरन राजीव गाँधी कोर्ट के फैसला पलट देबे वाला कानून बनवा दिहले रहले. अब उहे लोग कहत बा कि कानून में आस्था के जगहा ना होखे के चाहीं.

अयोध्या विवाद में सुलह समझौता के तलाश के खिलाफ दुनु समुदाय के कट्टरपंथी एकमत बाड़े. हिन्दुओ महासभा कहले बा कि ऊ फैसला का खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील करी कि मस्जिद खातिर एक तिहाई जमीन काहे दिहल जाई जब सुन्नी वक्फ बोर्ड के दावा खारिज कइल जा चुकल बा. हिन्दू महासभा एह मुद्दा पर नया आन्दोलन शुरु करे के तइयारी में लाग गइल बा.

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