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ग्रामीण प्रबंधन संस्थान के प्रतिष्ठा गिरावे के साजिश


गुजरात के आनन्द में स्थापित इरमा के प्रतिष्ठा गिरावे के साजिश का खिलाफ ओहिजे के एगो प्रोफेसर के वी राजू आवाज उठवले बाड़न. प्रो॰ राजू के कहना बा कि जे लोग इरमा के मूल चरित्र के बदले के कोशिश कर रहल बा से गलत बा आ ओह लोग के संस्था बदले के बदले अपना में बदलाव ले आवे के चाहीं ना त संस्थान छोड़ के चल जाये के चाहीं.  संस्थान के संस्थापक डा॰ वर्गीज कूरियन संस्थान के मूल चरित्र बदले का कोशिश का खिलाफ साल २००६ में चेयरमैन पद से इस्तीफा दे दिहले रहलें आ उम्मीद जतवले रहलें कि संस्थान के मूल चरित्र में बदलाव ना आवे दिहल जाई. कूरियन तब कहले रहलें कि किसानन के मालूम बा कि उनका खातिर बेहतर का बा. किसानन के बस अतने चाहीं कि उनका अपना लक्ष्य का प्राप्ति में सहायता देबे खातिर प्रशिक्षित प्रबंधक मिल सकसु.

बाकिर अब संस्थान के मौजूदा चेयरमैन योगेन्द्र कुमार अलघ,  आ डायरेक्टर विवेक भण्डारी  संस्थान के चरित्र बदलल चाहत बाड़न ऊ इरमा के आईआईएम के बी टीम बनावल चाहत बाड़न. उनकर कोशिश बा कि नया कालेज खोलल जाव जहाँ उद्योग जगत के जरुरत पूरा करे वाला प्रबंधक पैदा कइल जाव.

प्र॰ राजू के कहना बा कि एह मकसद से बोलावल विचार गोष्ठी में संस्थान के फैकल्टी के बोलावल त गइल रहे बाकिर ओह लोग के बस बइठका में बइठे तक के संकेत दिहल गइल रहे कुछ बोले भा विरोध करे के ना. जवन वक्ता बोलावल गइल रहलें तवन अइसन रहलें जिनका के बेर बेर इयाद करवला के जरुरत रहे कि इरमा ग्रामीण प्रबंधन के संस्थान ह.

देश के एह प्रतिष्ठित संस्थान में आ रहल गिरावट का खिलाफ सगरी बुद्धिजीवियन के जुटला के जरुरत बा.

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