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अब दोषी तय करी कि जज के रही


प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह कांग्रेस का महाधिवेशन में साफ कर दिहलें कि उनका पर आरोप ना लगावे के चाहीं आ प्रधानमंत्री के पद विवाद से उपर राखे के चाहीं. कहलन कि ऊ लोक लेखा समिति का सोझा जवाब देबे के तइयार बाड़न. विपक्ष के जेपीसी के माँग ना मानल जा सके. लोग के बूड़बक बताह बूझत प्रधानमंत्री अपना सफाई में कहलन कि उनकर पार्टी आरोप लगते अपना मंत्रियन के पद से हटा दिहलसि. जबकि सही बात ई बा कि जब पानी नाक से उपर चलि गइल तब कार्रवाई शूरु भइल जवन कि लीपापोती के कोशिश बेसी बा. कलमाडी के तब ओह पद से हटावल गइल जवना के कवनो दाम नइखे आ खुद सीबीआई चाहत बिया कि उनका के आयोजन समिति से हटावल जाय. दूर संचार मंत्री ए॰ राजा के तबले बचाव कइल गइल जबले खुद प्रधानमंत्री के कार्यालय आरोप का जद में ना आवे लागल. सतर्कता आयोग के अध्यक्ष ओह दागी के बनावल गइल जवन कि खुद एगो घोटाला में आरोपी बा आ जवना के चयन के सही प्रक्रिया ना अपनावल गइल. अशोक चह्वाण के तब हटावे के पड़ल जब ऊ रंगे हाथ धरा गइलन. प्रधानमंत्री सिर्फ एक सवाल के जवाब दे देसु कि आजुवो थामस सतर्कता आयोग के अध्यक्ष का कुर्सी पर काहे बाड़न ? मानल जा सकेला कि प्रधानमंत्री खुद ईमानदार बाड़न बाकिर उनका ईमानदारी के लेके चाटल जाव का ? आ उनुकर लापरवाही के अनदेखी कर दिहल जाव ?

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