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विख्यात साहित्यकार आचार्य जानकीवल्लभ शास्त्री के निधन


हिन्दी के प्रकाण्ड विद्वान आ साहित्यकार आचार्य जानकीवल्लभ शास्त्री के निधन काल्हु उनुका मुजफ्फरपुर आवास पर हो गइल. ९५ साल के आचार्य हालही में तीन हफ्ता अस्पताल में रह के लवटल रहनी ह. आचार्य के जन्म साल १९१६ में गया जिला के मैगरा गाँव में भइल रहे बाकिर मुजफ्फरपुर में अध्यापन करत एहिजे बस गइल रहनी. कविता, उपन्यास, निबन्ध, संस्मरण हर विधा में आचार्य के पुस्तक प्रकाशित बाड़ी सँ.

आर्थिक तंगी में रहला का बावजूद आचार्य जानकीवल्लभ शास्त्री के स्वाभिमान में कवनो कमी ना रहे. पद्मश्री पुरस्कार खातिर चुना गइला का बाद जब सरकार उनुका से उनकर बायोडाटा मँगलसि त शास्त्री जी ओह चिट्ठी पर पद्मश्री अस्वीकार लिख के वापिस कर दिहलन. कहलन कि जेकरा उनुका कृतित्व का बारे में जानकारी नइखे ओकरा से कवनो सम्मान लिहला के जरुरत नइखे. बिहार सरकार में कला आ संस्कृति मंत्री सुखदा पाण्डेय शास्त्री जी के एक लाख रुपिया के सहायता के एलान कइले रहली, इहो कहले रहली कि राथि कोषागार में आ गइल बा. आचार्य जी दुनिया छोड़ के चल गइनी बाकिर ऊ राशि ना मिल पावल.

शास्त्री जी के माई बचपने में मर गइल रहीं आ उनुकर लालन पोषण एगो विधवा पड़ोसी कइली. निर्दयी बाप का चलते पूरा बचपन कष्ट में गुजरल. एही एकाकीपन से शायद उनुका भीतर के साहित्यकार जाग गइल आ बाद में साहित्यसृजना में शास्त्री जी लगातार आगे बढ़त गइनी.

बारह साल के उमिर में अपना से तीन साल बड़ लड़िकी से शादी हो गइल रहे. शास्त्री जी के पूरा नाम आचार्य जानकीवल्लभ ललितललाम शास्त्री सुन के आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी ठहाका मार के हँस पड़ल रहले.

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