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हर ब्लाक में सचल अस्पताल


जमाना मोबाइल के बा. अब बैंक मोबाइल हो गइल कि मोबाइल बैंक हो गइल एह बहस के छोड़ नयका मोबाइल के खबर पढ़ीं. उत्तर प्रदेश के हर प्रखण्ड में मोबाइल अस्पताल मौजूद रही जवन कवनो घटना भा दुर्घटना का जगह तुरते चहुँप के ओहिजे चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करा दी. एगो भोजपुरी कहावत हऽ “मिले मियाँ के माँड़ ना बिरयानी के फरमाइश !” यूपी सरकार के अपना स्वास्थ्य केन्द्र आ अस्पतालन खातिर डाक्टर नइखे भेंटात बाकिर सरकार बीस बीस लाख के लागत से मोबाइल अस्पताल बनवा के ब्लाके ब्लाक भेजवा रहल बिया. अब ओहमें डाक्टर कहाँ से अइहें एकरा खातिर पता ना का व्यवस्था कइल जाई. जनता सरकार में एक बेर अइसने तीन तीन गो मोबाइल अस्पताल हर मेडिकल कालेज के भेजल गइल रहे. कतहीं कवनो मोबाइल अस्पताल काम ना कइलसि बाकिर ओकर उपकरण, एसी, जेनरेटर जरुरे कुछ लोगे के कामे आ गइल. अबकियो शायद अइसने कुछ होखे जा रहल बा. घपला बाजी में माहिर स्वास्थ्य विभाग के हालत ई हो गइल बा कि कवनो अधिकारी स्वास्थ्य विभाग में जाइल नइखन चाहत. लखनऊ में छह महीना का भीतरे दू गो सीएमओ के हत्या का बादो बाकी सीएमओ सुधर गइल होखीहें एकर आशा कइल बेकार बा. शायद ऊ लोग एह भरोसे होखी कि ना ईमानदारी करब ना जान जाई. कवनो बेईमान भा घपलाबाज के मर्डर भइल नइखे. ओही लोग के मर्ड़र भइल बा जे घपलाबाजी के विरोध करत रहे.

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