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केन्द्र सरकार अन्ना के अनशन करे के चुनौती दिहलसि


केन्द्रीय मंत्रीमण्डल काल्हु अपना बईठक में अन्ना हजारे आ उनुका सहयोगियन का तरफ से पेश ड्राफ्ट पर विचार तक ना कइलस आ सरकारी पक्ष के ड्राफ्ट के कुछ विचार विमर्श का बाद सकार लिहलसि. अब इहे ड्राफ्ट संसद में पेश कइल जाई. सरकारी ड्राफ्ट सकारे के खबर सामने अइला का बाद अन्ना, उनुकर सहयोगी, आ विपक्षी दल के विरोध मुखर हो गइल बा. सरकार अन्ना के चुनौती देत कहले बिया कि ऊ चाहसु त १६ अगस्त से अनशन पर बईठ सकेले. अन्ना कहले बाड़े कि अगर अनशन से काम ना चली त ऊ जान देबे तक तईयार बाड़े. जनता के अब तईयार होखे के पड़ी आजादी के दूसरका लड़ाई लड़े ला. एह सरकार से कवनो उमेद ना राखल जा सके.

सरकार का तरफ से सकारल ड्राफ्ट लोकपाल बिल के अनुसार प्रधानमंत्री अपना कार्यकाल का दौरान लोकपाल का दायरा में ना आ सकी. हँ ओकरा हटला का बाद ओकरा खिलाफ जाँच करावल जा सकेला. दोसरे कवनो शिकायत सात साल का भीतर होखे के चाहीं. न्यायपालिका के एह लोकपाल से बाहर राखल जाई साथ ही सांसद आ मंत्रियनो के. लोकपाल कवनो शिकायत के जाँच त करवा सकी बाकिर मुकदमा ना चला सकी. लोकपाल के बहाली करे वाला नौ लोग का समिति में विपक्ष के नेता शामिल रहीहें ओबत्तीस दाँत का बीच जीभ का तरह, शायद दोसरे लोकपाल के अध्यक्ष कवनो न्यायाधीश रहीहें आ लोकपाल के नौ गो सदस्यन में से पाँच गो पूरा पूरा सरकारी मरजी के आ बाकी चार गो पर सरकार के असर रहही कें बा थोड़ बहुत. एह समिति में उहे लोग के राखल जाई जिनका कम से कम पचीस बरीस के अनुभव होखे. सरकारी कर्मचारियनो के लोकपाल का परिधि से बाहर राखल गइल बा कुछ उच्च पदाधिकारियन के छोड़ के. काहे कि सरकारो जानत बिया कि अधिकतर घपला घोटाला निचलका पदाधिकारियन से करवावल जाला.

अगर अइसन लोकपाल बिल जवना के आम लोग जोकपाल बिल के नाम दे दिहले बा पास हो गइल त फेर शायदे कवनो अइसन घोटाला होखी जे लोकपाल का दायरा में आ पाई. मौजूदा सगरी घोटालन जइसन घोटाला एह दायरा में ना आ पाई.

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