प्रधानमंत्री के बयान के धज्जी उड़ा दिहलसि विपक्ष

प्रधानमंत्री आजु संसद में अन्ना के गिरफ्तारी पर अपना बयान में अन्ना समर्थकन के विरोध करे के तरीका के गलत ठहरवले आ कहले कि संसद सर्वोच्च संस्था ह आ ओकरा के चुनौती दिहल जा रहल बा. कहलन कि सरकार लोकतांत्रिक अधिकारन के समर्थक हिय.

राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली के कहना रहल कि संसद के सर्वोच्चता पर त कवनो विवादे नइखे. विवाद एह पर बा कि सरकार का लगे भ्रष्टाचार से लड़े के राजनीतिक इच्छा शक्ति नइखे. कहलन कि जब बहुते वकील सरकार के सलाह दीहें त इहे होखे वाला बा.

लोकसभा में विपक्ष के नेता सुषमा स्वराज प्रधानमंत्री के लमहर बयान के असत्य के पुलिन्दा बतवली. कहली कि सरकार कइसे अपना के लोकतांत्रिक अधिकारन के समर्थक बतावत बिया जबकि चार जून का राति सूतल निहत्था लोग पर शामियाना का भीतर आँसू गैस छोड़ल गइल, लाठी चार्च कइल गइल, नौ अगस्त के भाजयुमो के रैली पर पुलिस के लाठीचार्ज करावल गइल, सोलह अगस्त के अन्ना हजारे के धारा १४४ तूड़े से पहिले गिरफ्तार कर लिहल गइल.

सुषमा स्वराज के सबले बड़ शिकायत रहल कि सरकार खुदे संसदीय परंपरा के, संसद के प्रतिष्ठा कम कइलसि जब लोकपाल बिल ड्राफ्ट करे वाला समिति में विपक्ष के कवनो प्रतिनिधि ना रखलसि. तब त कहलसि कि एह समिति में विपक्ष के जरूरते नइखे आ अब जब मामिला अझूरा गइल बा त संसद आ संसदीय परम्परा याद आवत बा.