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लोकपाल आंदोलन : संसद में के का कहल


नई दिल्ली, 28 अगस्त (आईएएनएस). लोकपाल के मुद्दा पर शनिचर का दिने संसद के दुनु सदन में आठ घंटे से अधिका समय ले बहस भइल. एह दौरान अन्ना के तीन गो बड़का मांग पर जहां विपक्ष आपन सहमति जतवलसि, ओहिजे सत्तापक्ष सशर्त सहमति बतवलसि. बहस पूरा भइला का बाद सांसदन के विचारन के ‘सदन के भावना’ बतावत अन्ना हजारे के तीनों मांग मान लिहल गइल. आईं पढ़ल जाव कि के का कहल :

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह : संसद आपन बाति कह दिहलसि. संसद की इच्छा, जनता के इच्छा ह.

अन्ना हजारे : जन लोकपाल के ई आधा जीत भइल बा. पूरा जीत अबही बाकी बा. ई पूरा युवा शक्ति के जीत ह. ई जनता के जीत ह. देश के जीत ह. ई सामाजिक संगठन के जीत ह. ई मीडिया के जीत ह.

लोकसभा में सदन के नेता प्रणब मुखर्जी : पिछला 40 साल में हमनी का ई विधेयक पारित ना करवा पइनी. हम सकारत बानी कि ई हमनी के सरकारन के गलती रहल.

लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज : अन्ना के आंदोलन में रोज रोज भ्रष्टाचार के सामना करे वाला आम लोग शिरकत कइले बा. उनुका लागत बा कि जन लोकपाल विधेयक उनुका निचला स्तर पर पसरल भ्रष्टाचार से मुक्ति दिआई.

संसद के स्थायी समिति के सदस्य लालू प्रसाद : अन्ना हजारे से सीखीं सभे कि 74 साल का उमिर में बिना कुछ खइले 12 दिन ले अनशन कइसे कइल हाव. डॉक्टर लोग अन्ना हजारे के ताकत के पीछे के राज के खुलासा करे खातिर शोध करे आ एगो किताब लिखे.

राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली : अन्ना हजारे के समर्थन में लोग के हुजूम साफ संकेत देत बा कि लोग मौजूदा इंतजाम से खुश नइखे. एहसे इहो साफ भइल बा कि लोग मौजूदा हाल सकारे के तइयार नइखन. कई क्षेत्र में भ्रष्टाचार जीवन के हिस्सा जइसन बन गइल बा.

जनता दल-युनाइटेड (जद-यू) के नेता शरद यादव : संसद में अइसन बहुते लोग बा जे जमीनी स्तर से संघर्ष करत एहिजा चहुँपल बा, कुछे लोग अइसन बा जिनकर बाप माई नेता रहले. .. देश संसद से चलावल जाला. एहिजा के लोग जाने ला कि खेत का होले आ लोग के दर्द का होला. अन्ना हजारे के सहयोगी अपना बानी पर काबू राखसु ना त हमनीओ का जानीले स कि पगड़ी के तरह उछालल जाला. हमनी के त ई हमेशा के काम ह.

संदीप दीक्षित (कांग्रेस) : राज्यो में लोकायुक्तन के नियुक्ति आ सगरी सरकारी विभागन में नागरिक चार्टर बनावे, आ निचलो दर्जा के कर्मचारियन के लोकपाल का दायरे में ले आवे के माँग पर हम अन्ना के टीम से सहमत बानी.

ज्योतिरादित्य सिंधिया (कांग्रेस) : आज हम जवना सामाजिक संगठनन के मांग पर विचार करे आइल बानी जा ओह संगठनन के सूचना के अधिकार देके संप्रगे सरकार मजबूत बनवलसि, एह बाति के भुलाये के ना चाहीं. हम चाहत बानी कि देश में सशक्त लोकपाल होखल चाहीं.

वरुण गांधी (भाजपा) : हमनी सांसदन के जनता के आवाज बने के चाहीं. जनता के सिर्फ वोटे देबे के अधिकार ना होला, बलुक आपन बातो कहे के पूरा हक होला. लाखों नौजवान आजु सड़कि पर एहसे उतरल बाड़े कि उनुका एगो सरकारी नौकरी खातिर लाखों रुपिया घूस में देबे के पड़ेला. अन्ना हजारे एगो विचार के नाम ह, एह विचार के जीत होखे के चाहीं.

मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के सांसद सीताराम येचुरी : अन्नाजी द्वारा राखल तीनों मांग पर हमनी का सैद्धांतिक रूप से सहमत बानी. एह माँगन के लोकपाल विधेयक में शामिल कइल जाव, लेकिन एकनी के भारतीय संविधान के अनुसारे लागू कइल जाव. सरकार एह मुद्दा पर एगो नया विधेयक ले आवे.

माकपा नेता बासुदेव आचार्य : हमनी का एगो मजबूत आ प्रभावी लोकपाल संस्था चाहत बानी. सरकारी लोकपाल विधेयक बेकार बा. ..भ्रष्टाचार खातिर कारपोरेट जगत, राजनेता अउर नौकरशाही के गठजोड़ बा. एह गठजोड़ के तूड़े के जरूरत बा.

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस

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