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इंजिनियरिंग प्रवेश परीक्षा प्रणाली में बदलाव साल २०१३ से


बरिसन से चलत आ रहल इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा प्रणाली में अगिला साल से बदलाव करे के फैसला केन्द्रीय मानव संसाधन मंत्रालय मंजूर कर लिहलसि. एह नया प्रणाली के लागू हो गइला का बाद अनेक तरह के प्रवेश परीक्षा ना होखी आ सगरी देश खातिर एकही प्रवेश परीक्षा करावल जाई. बतावल जात बा कि एहसे परीक्षार्थियन के सुविधा होखी आ उनुका एकही इम्तिहान देबे के पड़ी.

एह नया इम्तिहान के नामो बदल दिहल गइल बा. अब एकरा के आईसीट (Indian Science Engineering Eligibility Test, ISEET) कहल जाई. एकर परीक्षा दू खण्ड में लिहल जाई. दुनु खण्ड तीन तीन घंटा के होखी आ एके दिन करा लिहल जाई. साल २०१३ के प्रवेश परीक्षा मार्च भा अप्रेल २०१३ में होखी.

एहमें पहिला खंड में वस्तुनिष्ठ सवाल पूछल जाई. मकसद रही परीक्षार्थियन के समुझे के, सोचे के आ तार्किक विश्लेषण करे के क्षमता, कम्प्रिहेन्सन, क्रिटिकल थिंकिंग, आ लॉजिकल रिजनिंग, के जानकारी लिहल. अगिला खंड में परीक्षार्थियन के विज्ञान विषयन के जानकारी के जाँचल जाई. एह तरह से परीक्षार्थियन के सही आकलन हो पाई कि ऊ इंजिनियरिंग पढ़े लायक बाड़े कि ना.

हालांकि सगरी प्रक्रिया के सबले विवादास्पद बाति बा बारहवीं के बोर्ड परीक्षा में मिलल अंक के महत्व. कहल गइल बा कि बोर्ड में मिलल अंक के वेटेज चालीस फीसदी से कम ना होखी आ जरूरत पड़ले पर एकरा के सौ फीसदी तक कइल जा सकी. जबकि प्रवेश परीक्षा में मिलल अंक के वेटेज कवनो हालत में साठ फीसदी से अधिका ना होखी.

हर राज्य सरकार भा संस्थान एह बारे में आपन फैसला ले सकेला कि ऊ कवना अंके के कतना महत्व दी. मंत्रालय के कहना बा कि सांख्यिकी प्रक्रिया से देखल जा चुकल बा कि अलग अलग बोर्ड परीक्षा के अंक में कइसे संतुलन बनावल जा सकेला.

पहिले कहल गइल रहे कि कानपुर आईआईटी एह परीक्षा के संचालन करी बाकिर एकर संचाल सीबीएसई करी. हँ, कानपुर आईआईटी के शैक्षणिक समूह एह प्रणाली पर आगे के तौर तरीका जरूर तय करी. अंदाज लगावल जात बा कि पहिला साल के परीक्षा केन्द्र से अनुदानित संस्थाने खातिर होखी.

एह बदलाव का खिलाफ आवाज उठल शूरू हो गइल बा. कुछ लोग के कहना बा कि एह तरीका से प्रवेश मापदण्ड में एकरूपता ना आ पाई आ अलग अलग बोर्ड का चलते असंतुलन के हालात बन सकेला. कुछ खास बोर्ड से परीक्षा पास करे वालन के फायदा हो जाई त कुछ के नुकसान. एह तरीका से आईआईटी के विशिष्ट स्वरूप खतरा में पड़ जाई.

दोसरा तरफ कुछ लोग के कहना बा कि एहसे विद्यार्थी अपना बोर्डो परीक्षा पर पूरा ध्यान दीहें आ तोता रटन्त वाला प्रणाली आ कोचिंग के धंधा करे वालन के चंगुल से विद्यार्थी आजाद हो जइहे.

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