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काकोरी कांड के शहीद के याद कइल गइल


Kakori-Shaheed
सहारनपुर 18 दिसम्बर (वार्ता) देश के आजादी ला महान क्रान्तिकारी अशफाक उल्ला खां, ठाकुर रोशन सिंह आ राम प्रसाद बिस्मिल 19 दिसम्बर 1927 का दिने देश खातिर हंसते हंसत फांसी के फंदा चूम लिहले रहले. एगो अउर क्रान्तकारी राजेन्द्र नाथ लाहिडी के दू दिन पहिलही गोंडा जेल में फाँसी प लटका दीहले रहल अंगरेज सरकार.

महान क्रान्तिकारी शहीदे आजम भगत सिंह के भतीजा किरणजीत सिंह यूनीवार्ता. को बतवले कि क्रान्तिकारी दल मे अशफाक के खास मान रहल. काकोरी का घटना क बाद अशफाक पर कडा निगरानी शुरु भइल आ 26 सितम्बर 1925 के उनुका के पकड़े ला वारंटो निकालल गइल बाकिर अशफाक पुलिस के चकमा देत आपन काम लगातार करत रहलन. बाद में आठ दिसम्बर 1926 के दिल्ली पुलिस उनका के पकड़ लिहलसि.

पकड़इला का बाद काकोरी मुकदमा के प्रभारी तसदुक हुसैन, अधीक्षक. सी.आई.डी. इम्पीरियल ब्रांच, अशफाक से मिल के कहलन कि हम आ तू मुसलमान हईं स जबकि काफिर रामप्रसाद बिस्मिल आर्यसमाजी हवे आ हमनी के मजहब के जानी दुश्मन ह. उ मुल्क मे हिन्दूराज कायम कइल चाहत बा. तू समझदार हउवऽ एहसे तोहरा से कहल चाहत बानी कि अपना मजहब खातिर ओह काफिर रामप्रसाद के दोस्ती मे अपना के बरबाद मत करऽ आ सब कुछ साफ साफ कहि द. बाकिर अशफाक एह झाँसा में ना अइलन.

उनइस दिसम्बर 1927 के फजीरे छह बजे अशफाक फैजाबाद जेल मे फांसीघर के सीढि चढत फांसी के फन्दा लगे चहुँपले. रस्सी चूमके कहलन कि हमार हाथ कबो इंसानी खून से ना रंगाइल हमरा उपर लगावल अछरंग गलत बा आ हमार इंसाफ अब खुदा किहाँ होखी.

ओही दिने फाँसी चढ़ल अमर शहीद ठाकुर रोशनो सिंह पीछे ना रहले. ठाकुर रोशन सिंह 13 दिसम्बर 1927 के अपना एगो दोस्त के चिट्ठी लिखले कि एह हफ्ता हमरा के फाँसी होखी. रउरा हमार ला तनिको रंज मत करब. दुनिया में पैदा होखे वाला हर आदमी के मरहीं के होला. दुनिया में आदमी अपना के बदनाम मत करे आ मरत घड़ी ईश्वर के याद राखे. इहे दू गो बात होखे के चाहीं आ दुनू हमरा संगे बा. एहसे हमरा मौत प कवनो तरह के अफसोस कइला के जरूरत नइखे.

काकोरी काण्ड के आरोपी क्रान्तिकारी पंडित रामप्रसाद विस्मिल के जब फाँसी का एक दिन पहिले साँझ के पीए खातिर दूध दीहल गइल त मुसुकात कहले कि माई के अँचरा हमरा ला व्याकुल होखत बा. सबेरे हमरा ओही अंचरा के छाँह में जाए क बा आ अब ओही माई के दूध हमरा के नया जीवन दी. अब हमरा ई दूध नइखे पीए के.

फाँसी का दिने रोज का तरह सबेरे उठले. नहा के पूजा कइले आ भारत माता की जय, वन्दे मातरम कहत पंडित जी आगे बढ़ले, कहले “मालिक तेरी रजा रहे और तू ही तू रहे. बाकी न मै रहूं न मेरी आरजू रहे। जब तक कि तन मे जान रंगो मे लहू रहे तेरा ही जिक्र या तेरी जुस्तजू रहे।”

ओह दिन गोरखपुर जेल मे चारो ओर पुलिस के कडा पहरा रहे आ बाद में गोरखपुर जिला जेल से निकलल रहे शहीद पंडित राम प्रसाद बिस्मिल के पार्थिव शरीर.

आजु एही क्रांतिकारियन के सम्मान में कई जगहा सरधाजलि के कार्यक्रम भइल.

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