भाँड़ में जाव जनसंख्या नियन्त्रण


नैनीताल, 04 अगस्त (वार्ता). उत्तराखंड उच्च न्यायालय काल्हु शुक का दिने एगो याचिका पर फैसला देत राज्य सरकार के ओह फैसला के रद्द क दिहलसि कि तिसरका बच्चा जनमावे ला मातृत्व अवकाश ना दीहल जाई.
वरिष्ठ न्यायाधीश राजीव शर्मा के एकलपीठ हल्द्वानी के रहे वाली उर्मला मसीह के याचिका पर सुनवाई का बाद राज्य सरकार के फैसला रद्द क दिहलसि.
अदालत कहलसि कि राज्य सरकार के कदम असंवैधानिक बा आ मसीह के तिसरको बच्चा जनमवला पर मातृत्व अवकाश देबहीं के पड़ी. अदालत के कहना बा कि कानून तिसरका बच्चा जनमवला खातिर मातृत्व अवकाश देबे से मना ना करे.
मसीह अपना याचिका में कहले रही कि ऊ सरकारी कर्मचारी हई आ 30 जून 2015 से नौ दिसंबर 2015 का बीच ऊ तिसरका बच्चा जनमावेला मातृत्व अवकाश मंगले रहुवी बाकिर ओकर आवेदन एह बिना पर निरस्त क दीहल गइल कि तिसरका बच्चा जनमावे ला मातृत्व अवकाश ना दीहल जाव.
एह पर अदालत कहलसि कि सरकार के ई कदम मातृत्व लाभ अधिनियम 1961 के धारा 27 का उलुटा बा. अदालत के कहना बा कि ई अधिनियम तिसरका बच्चा जनमावे ला मातृत्व अवकाश देबे से मना नइखे करत. आ राज्य सरकार के ई कदम संविधान के मौलिक अधिकार के प्रावधानन का खिलाफ बा.
अपना फैसला में अदालत पंजाब अउर हरियाणा उच्च न्यायालय के ओह फैसला के हवाला दिहलसि जवना में रुखसाना बनाम हरियाणा सरकार के मामिला में साफ-साफ कहल गइल बा कि मातृत्व लाभ अधिनियम 1961 में दू बच्चा जनमवला का बाद मातृत्व अवकाश ना देबे के प्रावधान मौजूद नइखे.