जब तक पूरे ना हों फेरे सात, तब तक बबुनी नाहीं बबुआ के

हर पाँच बरीस पर होखे वाला लोकसभा चुनाव के अबकी बेर छह गो फेरा पूरा हो गइल काल्हु. अब सभे अगिला फेरा के दउड़ में लागि गइल बा. अगिला अतवार 19 मई के ई सतवों फेरा पूरा हो जाई आ ओकरा बाद शुरु हो जाई टीवी चैनलन पर बहसा-बहसी के दौर.

अबकी के चुनाव के खासियत कहल जाव त इहे बा कि एह चुनाव में अकेला गोल भाजपा के बा जे अपना संधतिया गोलन के साथ लिहला का बावजूद अतना सीट पर ताल ठोकले बिया जतना से सरकार बनावे जोग सीट जीतल जा सके. भारत के सबले पुरान दल कांग्रेस के हाल ई बा कि अगर ऊ सगरी सीट जीतो जाई तबहियो सरकार बनावे जोग सांसद ओकरा लगे ना रहीहें आ ओकरा दोसरा के मुँह जोहहीं के पड़ी. वइसे सबले पुरान दल कहत घरी एगो पुरान कहानी याद आ गइल. एगो पप्पू का लगे खानदानी खुरपी रहुवे. जब खुरपा खिया जाव त ओकरा के बदल दिआव आ जब मूठ टूट जाव त ओकरा के. बाकिर खुरपिया खानदानिए रहि जाव. कांग्रेस के अतना बेरि टूट-फूट भइल बा कि आजादी दिआवे वाला कांग्रेस से मौजूदा कांग्रेस के नाता खोजे में ओतने दिक्कत हो जाई जतना राहुल के मजहब आ नागरिकता खोजे में आवत बा.

भाजपा आ कांग्रेस का बाद के बाकी गोल त बस एह इन्तजार में बाड़ें कि बिलाई का भागे सिकहर टूटे आ मलाई चाटे के सुतार बनि जाव. देश आ हिन्दुवन के दुर्भाग्य से अगर भाजपा के सरकार ना बनल त ऊ जूतम-पैजार देखे के मिली कि ओह कुकुर बझाँव में कान के परदा फाटे लागी.

उमीद कइल जाव कि देश के बहुसंख्यक समाज आपन जिम्मेदारी समुझले होखी आ देश खातिर भोट कइले होखी. ना त तरह तरह के घोटाला आ चोरी में सजायाफ्ता भा जमानत पर चलत मुजरिमन के चाँदी हो जाई आ हमनी के आवे वाला पीढ़ी गरिया के निहाल हो जाई.