सरकारी नौकरी आ शिक्षण संस्थानन में दाखिला खातिर महाराष्ट्र में मराठा समुदाय खातिर दीहल गइल 16 फीसदी आरक्षण के अंसैवाधिनक मानत सुप्रीम कोर्ट कह दिहलसि कि ई आरक्षण खातिर पहिले से तय कइल जा चुकल पचास फीसदी सीमा से अधिका हो जात बा. अइसन कवनो आधार नइखे लउकत जवना का आधार पर मराठा समुदाय के आरक्षण जोग मानल जा सके.

जान जाईं कि एह मामिला में अउरिओ राज्य सरकार लागल रहली सँ काहें कि अनेके राज्यन में आरक्षण तय सीमा के पार जा चुकल बा आ अब ओहिजो एकरा खिलाफ आवाज उठ सकेला. सबले खास बाति इहो बा कि केन्द्रो सरकार मराठा आरक्षण से सहमति जतवलसि अदालत में बाकिर ई सहमति बेमानी हो गइल.

अदालत इहो कहलसि कि राज्य सरकारन का लगे अइसन कवनो अधिकार नइखे जवना तहत ऊ कवनो जाति भा समुदाय के पिछड़ी जाति का सूची में जोड़ सको. राज्य सरकार आपन सुझावे भर राष्ट्रपति का लगे भेज सकेले आ राष्ट्रपतिए ई जोड़ घटाव कर सकेलें.

महाराष्ट्र सरकार के दीहल एह मराठा आरक्षण के मुंबई हाई कोर्ट मान लिहले रहुवे. बाकिर सुप्रीम कोर्ट ओकरा फैसला के पलटि दिहलसि. हालांकि इहो कहलसि कि एह आरक्षण का तहत पहिले दीहल जा चुकल दाखिला भा नौकरी पर एह फैसला से कवनो असर ना पड़ी आ पिछला बहाली आ दाखिला बरकरार मानल जाई.

एगो दोसरा फैसला में केन्द्र सरकार का खिलाफ अवमानना के कार्रवाई रोक दिहलसि सुप्रीम कोर्ट बाकिर कहलसि कि केन्द्र सरकार काल्हु ले बता देव कि ऊ दिल्ली के आक्सीजन कइसे दी. दिल्ली हाई कोर्ट आक्सीजन सप्लाई के निगरानी करत रही.

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