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भतरा ओकरा के छोड़लसि कि ऊ भतार के छोड़लसि


आजु सोशल मीडिया पर जोरदार चरचा बा आमिर खान के दुसरका तलाक के. दुनु बियाह ऊ हिन्दू लइकी के मुसलमान बना के कइलसि. देश आजाद बा. केहू आपन मुँह मरावे भा .. एहसे दोसरा के का. बाकिर एगो सवाल त बनते बा कि अतना बड़हन आबादी में कुछ हिन्दू लइकियन के कवनो हिन्दू लइका काहें ना पसन्द आवे. आ दोसरा तरफ कुछ मुसलमान लइकन के कवनो मुसलमान लइकी से निकाह करे के मन काहें ना करे. ओहनी के चाहीं हिन्दूए लइकी बाकिर ओकरा के हिन्दू रहे दीहल बरदाश्त ना होखे. हिन्दू लइकी अपना मुस्लिम प्रेमी का मोह में मुसलमान बन जाली सँ बाकिर अपना प्रेमी के हिन्दू काहें ना बना पावेली सँ.

खैर किरन राव खान त किस्मत वाली निकलली कि सूटकेस में ना भेंटइली. बाकिर बहुते लोग के दिमाग ई सोच के खराब होखत बा कि तलाक दीहल के? भतरा बेगम के छोड़लसि कि बेगम भतार के? दुनु के साझा बयान आइल बा कि अब ऊ लोग मिल के तय कइले बा कि भतार आ बेगम ना रहि के अपना बेटा के साझा बाप-महतारी बन के रही लोग. आ ई खबर अबहीं सोर ना धइलसि तबले दोसरा गाछ के फुनुगी लउके लागल. जोरदार हवा इहो बा कि अबकी आमिर खान के दिल आखिरकार एगो मुसलमान लइकी पर आइए गइल बा. कहीं ओकरे चलते त किरन डूबल त ना तय क लिहलसि?

#FatimaSanaShaikh#AamirKhan#KiranRao
Fatima sana Shaikh’s father is Hindu while mother is muslim . Reverse Love Jihad . 🙄
But mother’s surname is Tabassum and father’s name is Sharma but She is Shaikh 😂
Gjb ki nautanki hai pic.twitter.com/6Ttjqc6yKU— Dharmic Boy❣️ (@Bhartiy_Boi) July 3, 2021

घालमेल एहिजो गजब के बा. फातिमा सना शेख के बाप हिन्दू आ महतारी मुसलमान हई. दुनु में केहू के सरनेम में शेख नइखे बाकिर फातिमा के नाम मे शेख जरुर बा. फातिमा के कहना बा कि ऊ नस्तिक हई आ मुसलमान नास्तिक ना हो सके. एह हिसाब से इहो आमिर के शिकार बने के योग्यता राखत बाड़ी आ निकाह का बाद इऩको नास्तिकता के बुखार उतरहीं के बा.

लगे हाथ हिन्दू लइकन ला एगो सलाह. खतना करावल पार ना लागे त सरकमसीजन करा लेव लोग. कुछ लइकियन के कटुवे भावे ला, ओहनी ला आसानी हो जाई. कटुओ भेंटा जाई आ कटाए के जरुरतो ना पड़ी. भा हिन्दू माई बाप अब शुरुए से अपना लइकिन के ढोलना पहिरावल शुरु कर देव. मुगल शासन का दौरान एह गहना के शुरुआत भइल रहुवे. अब के त मालूम ना बाकिर तबके ढोलना में सूअर के हड्डी डालल जात रहुवे. काहे कि सूअर से फरके रहेलें मुसलमान. अगर हर हिन्दू लइकी कवनो ना कवनो रुप में सूअर के हड्डी अपना देह पर राखल शुरु कर देव त शायद एह जिहाद से छुट्टी मिल पावे.

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